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क्या सरफेसी एक्ट प्लॉट पर लागू हो सकता है?

क्या सरफेसी एक्ट प्लॉट पर लागू हो सकता है? यह इस बात पर निर्भर करता है कि जमीन किस तरह की है। अगर प्लॉट खेती वाली जमीन नहीं है और लोन के लिए गिरवी रखा गया है, तो आमतौर पर सरफेसी एक्ट लागू होता है। लेकिन खेती की जमीन को इस कानून से साफ तौर पर बाहर रखा गया है, और यह तय करना जितना आसान लगता है, उतना है नहीं।

भारतीय व्यक्ति सरफेसी एक्ट और अपनी जमीन के दस्तावेज देखते हुए
MJ

Mohit Juneja

Reviewed by FREED India, Debt Resolution Specialists

28th September 2026
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KEY TAKEAWAYS

  • क्या सरफेसी एक्ट प्लॉट पर लागू हो सकता है? आमतौर पर हां, अगर जमीन खेती वाली नहीं है, लेकिन खेती की जमीन इस कानून से बाहर है।

  • सरफेसी एक्ट उन सिक्योर्ड लोन पर लागू होता है जिनमें कोई प्रॉपर्टी या संपत्ति गिरवी रखी गई हो, और लोन की रकम एक तय सीमा से ज्यादा हो।

  • अगर आपका प्लॉट खेती की जमीन में गिना जाता है, तो बैंक को सरफेसी एक्ट की बजाय सिविल कोर्ट के जरिए रिकवरी करनी होगी।

  • जमीन खेती की है या नहीं, यह सिर्फ सरकारी रेवेन्यू रिकॉर्ड से तय नहीं होता, यह भी देखा जाता है कि गिरवी रखते वक्त वहां वाकई खेती हो रही थी या नहीं।

सरफेसी एक्ट किन लोन पर लागू होता है?

सरफेसी एक्ट (एक कानून जो बैंकों को गिरवी रखी संपत्ति वापस लेने का अधिकार देता है) उन लोन पर लागू होता है जो सिक्योर्ड होते हैं, यानी जिनमें कोई घर, प्लॉट या दूसरी संपत्ति बैंक के पास गिरवी रखी गई हो। अगर लोन अनसिक्योर्ड है, जैसे पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड का बकाया, तो सरफेसी एक्ट वहां लागू नहीं होता।

इस कानून के लागू होने के लिए दो चीजें जरूरी हैं, लोन के बदले कोई संपत्ति गिरवी रखी गई हो, और लोन का खाता एनपीए (यानी लोन खाता जिसे बैंक ने खराब घोषित कर दिया हो) घोषित हो चुका हो। सिर्फ इतना जानना काफी नहीं है, यह समझना भी जरूरी है कि यह कानून किस तरह की संपत्ति पर लागू होता है और किस तरह की संपत्ति पर नहीं, खासकर तब जब बात प्लॉट या खाली जमीन की हो।


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क्या सरफेसी एक्ट प्लॉट पर लागू होता है?

सीधा जवाब है, हां, अगर वह प्लॉट खेती की जमीन नहीं है। रिहायशी प्लॉट, कमर्शियल प्लॉट, या कोई भी गैर-खेती वाली जमीन जो लोन के लिए गिरवी रखी गई हो, सरफेसी एक्ट के दायरे में आती है, ठीक उसी तरह जैसे कोई घर या फ्लैट आता है।

लेकिन खेती की जमीन इस कानून से साफ तौर पर बाहर है, यह सरफेसी एक्ट के सेक्शन 31(i) में लिखा हुआ है। यहां एक जरूरी बात समझनी होगी, जो ज्यादातर लोग नहीं जानते। सिर्फ इसलिए कि सरकारी रेवेन्यू रिकॉर्ड में जमीन को "खेती की जमीन" लिखा गया है, इसका मतलब यह नहीं कि सरफेसी एक्ट वहां लागू नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में साफ कहा है कि असली सवाल यह है कि लोन के लिए जमीन गिरवी रखते वक्त वहां वाकई खेती हो रही थी या नहीं, सिर्फ कागज पर क्या लिखा है, यह अकेले काफी नहीं है। अगर जमीन पर सालों से कोई खेती नहीं हो रही, या लोन किसी होटल या बिजनेस के लिए लिया गया था, तो अदालतें अक्सर यह मानती हैं कि छूट लागू नहीं होगी, चाहे रिकॉर्ड में कुछ भी लिखा हो।

इसका मतलब यह है कि यह सवाल जितना सीधा लगता है, उतना है नहीं, और आपकी अपनी जमीन के बारे में यह तय करने के लिए किसी वकील से बात करना ही सबसे सही तरीका है।


सरफेसी एक्ट किन चीज़ों पर लागू होता है?

  • घर या फ्लैट जो लोन के लिए गिरवी रखा गया हो।

  • रिहायशी या कमर्शियल प्लॉट जो खेती की जमीन नहीं है।

  • फैक्टरी, दुकान, या कोई बिजनेस से जुड़ी संपत्ति जो सिक्योरिटी के तौर पर दी गई हो।

  • वह लोन जिसमें बकाया रकम कम से कम ₹1 लाख हो, इससे कम रकम वाले मामलों में सरफेसी एक्ट लागू नहीं होता।

  • वह खाता जो एनपीए घोषित हो चुका हो, सिर्फ एक-दो किस्त छूटने से यह कानून तुरंत लागू नहीं हो जाता।

सरफेसी एक्ट से क्या बाहर रखा गया है?

सबसे बड़ा अपवाद है खेती की जमीन, जैसा ऊपर बताया गया, बशर्ते वह जमीन गिरवी रखते वक्त वाकई खेती के लिए इस्तेमाल हो रही हो। इसके अलावा, ₹1 लाख से कम रकम वाले सिक्योर्ड लोन भी इस कानून के दायरे से बाहर हैं।

कुछ और चीजें भी बाहर हैं, जैसे किसी सामान पर सिर्फ गिरवी (लियन) का अधिकार, या ऐसी चल संपत्ति जो सिर्फ प्लेज (गिरवी) के तौर पर दी गई हो, न कि पूरी तरह से मॉर्गेज के तौर पर। इन सब मामलों में अगर बैंक को रिकवरी करनी हो, तो उसे कोई दूसरा कानूनी रास्ता अपनाना पड़ता है, सरफेसी एक्ट का नहीं।


कैसे पता करें कि आपकी जमीन खेती वाली है या नहीं?

सबसे पहला कदम है अपनी जमीन के रेवेन्यू रिकॉर्ड (जैसे 7/12 उतारा, पट्टा, या जमाबंदी, यह राज्य के हिसाब से अलग-अलग नाम से जाना जाता है) को ध्यान से देखना। इसमें जमीन के इस्तेमाल की श्रेणी लिखी होती है।

लेकिन जैसा ऊपर बताया गया, सिर्फ यह रिकॉर्ड देख लेना काफी नहीं है। यह भी सोचना जरूरी है कि जब आपने लोन के लिए जमीन गिरवी रखी थी, उस वक्त वहां वाकई खेती हो रही थी या नहीं, फसल, सिंचाई, या खेती से जुड़ी कोई असली गतिविधि। अगर लोन किसी घर बनाने, दुकान खोलने, या बिजनेस के लिए लिया गया था, तो भले ही रिकॉर्ड में जमीन "खेती की" लिखी हो, अदालत यह मान सकती है कि असल में वह खेती की जमीन नहीं थी। इस पूरी बात को ठीक से समझने के लिए अपने दस्तावेज लेकर किसी वकील से मिलना सबसे भरोसेमंद तरीका है।


अगर सरफेसी एक्ट लागू नहीं होता तो क्या होगा?

अगर आपकी जमीन वाकई खेती की जमीन साबित होती है, तो इसका मतलब यह नहीं कि बैंक अपना पैसा वापस नहीं ले सकता। इसका सीधा मतलब सिर्फ इतना है कि बैंक को सरफेसी एक्ट के तेज, बिना कोर्ट गए वाले तरीके की बजाय, सिविल कोर्ट या डीआरटी (यानी लोन के मामलों के लिए बनी खास सरकारी अदालत) के जरिए सामान्य कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी।

यह एक असली, वैध सुरक्षा है, कोई खामी या बचने का तरीका नहीं, यह कानून खेती करने वालों की जमीन को बचाने के मकसद से बनाया गया है। लेकिन इसे इस तरह से नहीं देखना चाहिए कि इससे लोन चुकाने की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है, यह सिर्फ रिकवरी के रास्ते को बदल देता है।


इस बीच आपके बाकी लोन का क्या होगा?

सरफेसी एक्ट का यह पूरा मामला सिर्फ आपकी गिरवी रखी हुई प्रॉपर्टी और उससे जुड़े सिक्योर्ड लोन तक सीमित है। आपके बाकी लोन, जैसे पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड का बकाया, इस पूरी प्रक्रिया से अलग, अपने आप चलते रहते हैं।

अक्सर ऐसा होता है कि सिक्योर्ड लोन की चिंता में लोग अपने बाकी अनसिक्योर्ड लोन को नजरअंदाज कर देते हैं, और जब तक इस मामले का हल निकलता है, तब तक वह बाकी कर्ज संभालना और मुश्किल हो जाता है।


इस मामले में FREED आपकी कैसे मदद कर सकता है

फ्रीड सरफेसी एक्ट, सिक्योर्ड लोन, या इस पूरी कानूनी प्रक्रिया में सीधे तौर पर कोई मदद नहीं करता, यह मामला सीधे आपके और बैंक के बीच, या जरूरत पड़ने पर डीआरटी के जरिए ही सुलझता है।

फ्रीड जिस चीज़ में मदद करता है, वह है इसके साथ चल रहा अलग, अनसिक्योर्ड कर्ज, पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड का बकाया। अगर आप अभी भी किस्तें चुका पा रहे हैं लेकिन कई कर्ज एक साथ संभालना मुश्किल हो रहा है, तो फ्रीड का डेब्ट कंसोलिडेशन प्रोग्राम इन्हें एक ही, कम किस्त वाले लोन में बदलने में मदद कर सकता है। और अगर वाकई पूरा कर्ज चुका पाना संभव नहीं रह गया है, तो फ्रीड का सेटलमेंट प्लान आखिरी विकल्प के तौर पर मौजूद है।


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कुछ जरूरी बातें

  • अपनी जमीन के दस्तावेज और उसके इस्तेमाल का पूरा रिकॉर्ड संभाल कर रखें, सिर्फ रेवेन्यू रिकॉर्ड ही काफी नहीं है, अगर वहां वाकई खेती हो रही है तो उसके सबूत भी जरूरी हैं।

  • यह मत मान लीजिए कि रिकॉर्ड में "खेती की जमीन" लिखा होना अपने आप में सरफेसी एक्ट से बचा देगा, अदालतें इससे आगे जाकर असली इस्तेमाल भी देखती हैं।

  • किसी भी नोटिस या कानूनी कार्रवाई का जवाब देने से पहले वकील से सलाह लें, खासकर अगर आपको लगता है कि आपकी जमीन को गलत तरीके से गैर-खेती वाली मान लिया गया है।

  • अपने सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड लोन को अलग-अलग समझें, दोनों की समस्या और दोनों का हल, दोनों ही अलग हैं।

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Sources

दावा

स्रोत

सरफेसी एक्ट के सेक्शन 31(i) के तहत खेती की जमीन इस कानून से बाहर है

सरफेसी एक्ट, 2002, सेक्शन 31(i), इंडिया कोड (भारत सरकार)

सिर्फ रेवेन्यू रिकॉर्ड में जमीन का "खेती की" के तौर पर दर्ज होना काफी नहीं है, गिरवी रखते वक्त वास्तविक खेती इस्तेमाल ही निर्णायक कसौटी है

Indian Bank v. K. Pappireddiyar, (2018) 18 SCC 252; ITC Limited v. Blue Coast Hotels Limited, (2018) 15 SCC 99; K. Sreedhar v. Raus Construction Pvt. Ltd., 2023 SCC OnLine SC 13

₹1 लाख से कम के सिक्योर्ड लोन पर सरफेसी एक्ट लागू नहीं होता

सरफेसी एक्ट, 2002, सेक्शन 31

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Mohit Juneja writes educational content at FREED on debt management, credit scores, loan repayment, and borrowing best practices. His content is shaped by expert insights and industry knowledge, helping readers better understand their financial options and make informed decisions. mohit.juneja@freed.care

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Frequently Asked Questions

हां, आमतौर पर लागू होता है, अगर जमीन खेती वाली नहीं है। लेकिन खेती की जमीन को इस कानून से साफ तौर पर बाहर रखा गया है, यह तय करने के लिए जमीन का सरकारी रिकॉर्ड देखना जरूरी है।
सरफेसी एक्ट प्लॉट पर लागूसरफेसी एक्ट खेती की जमीनसरफेसी एक्ट सेक्शन 31