लोन सेटलमेंट प्रोसेस: बैंक के साथ लोन का सेटलमेंट कैसे करें?
ऋण निपटान टैब हो गया है जब आप अपना पूरा ऋण नहीं भर पा रहे हैं और बैंक या एनबीएफसी एक काम रकम में ऋण बंद करने के लिए तैयार हो जाता है। इसका मतलब ये नहीं कि लोन माफ़ हो गया। बैंक कुछ रकम छोड़ देता है, लेकिन बदले में आपकी सिबिल रिपोर्ट पर "सेटल" लिख जाता है जो कई सालों तक असर करती है। ये रास्ता सिर्फ तब लेना चाहिए जब और कोई रास्ता ना बचे।

फ्रीड इंडिया
Reviewed by फ्रीड इंडिया, कर्ज़ समाधान विशेषज्ञ
मुख्य सारांश
ऋण निपटान प्रक्रिया में बैंक एक काम रकम में पूरा ऋण बंद कर देता है लेकिन ये सिर्फ तब होता है जब पुनर्भुगतान वास्तव में असंभव हो।
सेटलमेंट के बाद सिबिल रिपोर्ट पर "सेटल्ड" स्टेटस 7 साल तक रहता है और स्कोर 75-100 पॉइंट तक गिर सकता है।
निपटान करने से पहले ईएमआई पुनर्गठन, कार्यकाल विस्तार, या अधिस्थगन जैसा विकल्प जरूर आज़माएं ये आपकी सिबिल बचा सकती है।
बिना लिखा हुआ समझौता पत्र के कोई भी भुगतान मत करें मौखिक या व्हाट्सएप से कोई पुष्टि नहीं चलता।
सेटलमेंट के बाद एनओसी (क्लीयरेंस लेटर एनओसी कहते हैं इसको) लेना जरूरी है बिना इसका लोन तकनीकी रूप से बंद नहीं माना जाता।
लोन सेटलमेंट क्या होता है?
सेटलमेंट कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे उधारकर्ता अपनी पसंद से चुनता है। बैंक इसे तभी मानते हैं जब आप सच में पैसों की मुश्किल में हों और पूरा कर्ज़ चुकाना आपके बस में न रहा हो।
जब बैंक मान जाता है, तो वह आपकी बकाया रकम में 50%* तक की छूट दे सकता है। असली रकम आपके बैंक पर निर्भर करती है। सेटलमेंट के बाद आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में "Settled" का निशान 7 साल तक रह सकता है।
*दिखाई गई दरें और सीमाएँ सिर्फ़ अंदाज़े के लिए हैं। आख़िरी शर्तें बैंक तय करता है। फ्रीड लोन देने वाली कंपनी नहीं है। किसी नतीजे की गारंटी नहीं है। कृपया अपने बैंक से सीधे पुष्टि करें।
ये "सेटल्ड" मार्क "क्लोज्ड" से बिल्कुल अलग है। अगर आपने लोन पूरा भर दिया सब ईएमआई सही समय पर तो सिबिल रिपोर्ट में "बंद" दिखता है। ये अच्छा संकेत है. लेकिन अगर आपने कम रकम में सेटलमेंट किया, तो "सेटल्ड" आता है और फ्यूचर में कोई भी बैंक ये देख के सतर्क हो जाता है।
आरबीआई दिशानिर्देशों के मुताबिक, अगर आप 90 दिन से ज्यादा ईएमआई नहीं भरते, तो बैंक आपके लोन को एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट मतलब बैंक की नजर में वह लोन "खराब" हो गया) घोषित कर सकता है। उसी बिंदु के बाद सेटलमेंट की बात ज्यादा गंभीरता से होती है।
7 साल तक "सेटल्ड" स्थिति CIBIL रिपोर्ट में रहता है। इसलिए ये फैसला सोच समझ के लेना चाहिए सिर्फ तभी जब कोई दूसरा रास्ता वास्तव में ना बचे।
लोन सेटलमेंट और लोन क्लोज़र में क्या फ़र्क है?
| बात | लोन सेटलमेंट | लोन क्लोज़र |
|---|---|---|
| क्या होता है | बैंक पूरी रकम से कम पैसा लेकर मामला ख़त्म करता है | आप पूरा बकाया चुका देते हैं |
| कितना देना होता है | बकाया से कम, बैंक की मंज़ूरी के हिसाब से | पूरी बकाया रकम, ब्याज समेत |
| सिबिल पर असर | रिपोर्ट में "Settled" लिखा आता है, स्कोर आमतौर पर गिरता है | रिपोर्ट में "Closed" लिखा आता है, स्कोर पर अच्छा असर |
| कब चुनें | जब पूरा कर्ज़ चुकाना सच में मुमकिन न रहे | जब आप पूरा पैसा चुका सकते हैं |
सीधी बात यह है कि अगर आप थोड़ी मुश्किल से भी पूरी EMI (हर महीने की किस्त) भर पा रहे हैं, तो क्लोज़र का रास्ता आपकी रिपोर्ट को साफ़ रखता है। सेटलमेंट उस हालत के लिए है जब पूरा चुकाना बस में नहीं रहा। इस फ़र्क को विस्तार से हमारे लोन सेटलमेंट और क्लोज़र वाले लेख में पढ़ें।
लोन सेटलमेंट के नुकसान क्या हैं?
सेटलमेंट राहत देता है, पर इसकी कीमत भी है। फ़ैसला लेने से पहले ये तीन बातें साफ़ जान लें:
- सिबिल पर "Settled" का निशान। बैंक को पूरी रकम नहीं मिली, यह बात आपकी रिपोर्ट में दर्ज हो जाती है। यह निशान 7 साल तक दिख सकता है और इस दौरान स्कोर आमतौर पर नीचे रहता है।
- नया लोन मिलने में समय। कई बैंक "Settled" खाता देखकर नया लोन या कार्ड देने में हिचकते हैं। जिस बैंक से सेटलमेंट हुआ, वह RBI के नियम के हिसाब से कम से कम 12 महीने तक आपको नया कर्ज़ नहीं देगा।
- हर बात लिखित में न हो तो जोखिम। अगर सेटलमेंट की शर्तें चिट्ठी में साफ़ नहीं लिखी हैं, तो बाद में बाकी रकम की माँग आ सकती है। इसलिए पैसे देने से पहले बैंक की लिखित चिट्ठी ज़रूर लें।
यह सब डराने के लिए नहीं है। बहुत से लोग सेटलमेंट के बाद समय पर बाकी बिल भरकर धीरे-धीरे अपना स्कोर फिर से ऊपर लाते हैं। बस फ़ैसला पूरी जानकारी के साथ लें।
पूरा कर्ज़ चुकाना मुश्किल हो रहा है?
फ्रीड के काउंसलर आपकी हालत समझकर सही रास्ता बताएँगे।
Book My Callबैंक लोन सेटलमेंट कब करना चाहिए?
लोन सेटलमेंट एक सीरियस स्टेप है। इस पर सोचना चाहिए जब आपकी फाइनेंशियल सिचुएशन सच में बहुत मुश्किल हो गई हो और पूरी पेमेंट सच में पॉसिबल हो ना हो।
कुछ असली हालात जिनमें सेटलमेंट की बात सही हो सकती है:
● नौकरी चली गई। एक अच्छी नौकरी थी, अचानक चली गई और महीनों तक कुछ नहीं मिला।
● मेडिकल इमरजेंसी। घर में किसी की सीरियस बीमारी और सारा पैसा वहाँ चला गया।
● इनकम में बड़ी कमी। बिज़नेस बंद हुआ, या सैलरी इतनी कम हो गई कि EMI देना सच में नामुमकिन हो गया।
● पारिवारिक संकट। कोई ऐसा हादसा जिसने पूरी इनकम और सेविंग्स दोनों ले ली।
ये वो लोग हैं जिनके लिए सेटलमेंट एक रियल ऑप्शन बन जाता है इस लिए नहीं कि उन्होंने कुछ गलत किया, बाल्की इस लिए कि लाइफ ने कुछ ऐसा किया जो उन्होंने सोचा नहीं था।
सेटलमेंट टैब पर विचार न करें जब आप सिर्फ "थोड़ा स्ट्रेस्ड" महसूस कर रहे हैं, या लोन मैनेज करना मुश्किल लग रहा है लेकिन रीपेमेंट अभी भी पॉसिबल है। उस सिचुएशन में बेहतर ऑप्शन हैं जो हम अगले सेक्शन में देखेंगे।
एक बात क्लियर करें: यहां कोई ब्लेम नहीं है। यह आपकी गलती नहीं है कि आप यहां हैं। लेकिन सेटलमेंट का डिसीजन लेने से पहले, उन ऑप्शंस को ज़रूर ट्राई करें जो आपकी CIBIL बचा सकती हैं।
कानूनी कार्रवाई कब और कैसे होती है, यह जानने के लिए हमारा पर्सनल लोन डिफ़ॉल्ट पर कानूनी कार्रवाई वाला लेख पढ़ें।
सेटलमेंट से पहले कौन से ऑप्शन देखने चाहिए?
सेटलमेंट सिर्फ तब सोचें जब ये चार ऑप्शन सच में काम नहीं किए। इनमें पहले सीरियसली ट्राई करें क्योंकि ये आपकी CIBIL रिपोर्ट को बचा सकते हैं।
- ऑप्शन 1: EMI रीस्ट्रक्चरिंग बैंक से बात करें और EMI की रकम कम करवाने या रीपेमेंट प्लान बदलने की रिक्वेस्ट करें। अगर इनकम कम हो गई है पर कुछ तो आ रही है, यह पहला ऑप्शन होना चाहिए।
- ऑप्शन 2: टेन्योर एक्सटेंशन लोन की टाइम पीरियड (टेन्योर मतलब लोन कितने महीने में भरना है) बढ़ाएँ। टेन्योर बढ़ाने से मंथली EMI कम हो जाती है। आप थोड़ा ज़्यादा पेमेंट करते हैं, लेकिन मंथली प्रेशर कम होता है।
- ऑप्शन 3: मोरेटोरियम (टेम्पररी पॉज़) कुछ महीने के लिए EMI पॉज़ करने की रिक्वेस्ट। मोरेटोरियम (कुछ टाइम के लिए EMI बंद इसको मोरेटोरियम कहते हैं) तब काम आता है जब इनकम टेम्पररी तौर पर रुक गई हो और कुछ महीने में वापस नॉर्मल होने की उम्मीद हो।
- ऑप्शन 4: लोन कंसोलिडेशन अगर आपके कई सारे लोन हैं क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन, लोन ऐप उन्हें एक लोन में मर्ज करना है। लोन कंसोलिडेशन (कई लोन को एक में जोड़ना) से एक ही EMI देनी पड़ती है। इसके लिए एक नया लोन लेना पड़ता है, इसलिए यह सिर्फ तब सही है जब क्रेडिट प्रोफाइल अलाउ करे।
अगर इन में से कोई भी ऑप्शन काम नहीं कर रहा है और पूरी रीपेमेंट सच में इम्पॉसिबल लग रही है, तब लोन सेटलमेंट की बात करना सही हो सकता है।
लोन सेटलमेंट प्रोसेस स्टेप बाय स्टेप बैंक से कैसे करें?
यह जनरल प्रोसेस है जिसे आप खुद फॉलो कर सकते हैं। हर स्टेप में क्या करना है, सीधा और साफ-साफ:
- 1
पूरा लोन समझें
अपनी लोन स्टेटमेंट में टोटल आउटस्टैंडिंग, इंटरेस्ट, और पेनल्टी चार्ज साफ-साफ लिखें।
- 2
हार्डशिप का प्रूफ इकट्ठा करें।
जॉब लॉस लेटर, मेडिकल बिल, या इनकम ड्रॉप का कोई भी लिखा हुआ प्रूफ इकट्ठा करें।
- 3
बैंक की रिकवरी टीम से मिलें
कस्टमर केयर नहीं, सीधे बैंक की रिकवरी या कलेक्शन टीम से संपर्क करें और अपनी स्थिति समझाएं।
- 4
लिखित में सेटलमेंट रिक्वेस्ट दें
अपनी रिक्वेस्ट और हार्डशिप डॉक्यूमेंट्स के साथ लिखा हुआ प्रपोज़ल दें कितना अमाउंट आप दे सकते हैं, यह साफ़-साफ़ बताएं।
- 5
नेगोशिएट करें, जल्दी कमिट करें
बैंक पहली बार में ज़्यादा मांग सकता है। शांत रहें। सिर्फ़ वही अमाउंट कमिट करें जो आप असल में दे सकते हैं।
- 6
सेटलमेंट लेटर मिलने के बाद ही पेमेंट करें।
कोई भी पेमेंट करने से पहले बैंक से ऑफिशियल सेटलमेंट लेटर लें, लेटरहेड पर, लिखित में। इसके बाद ही पेमेंट करें।
फ्रीड एक्सपर्ट टिप
बैंक से बकाया रकम को तीन हिस्सों में लिखित में माँगें: मूल रकम, जोड़ा गया ब्याज और लेट फ़ीस। इससे साफ़ दिखता है कि ऑफ़र असल में किस हिस्से पर छूट दे रहा है।
Settle My Loansलोन सेटलमेंट में कौन से डॉक्यूमेंट्स चाहिए?
सेटलमेंट की बात शुरू करने से पहले ये डॉक्यूमेंट्स तैयार रखें। हर एक का क्या काम है, वो भी समझें:
1. लोन अकाउंट स्टेटमेंट टोटल आउटस्टैंडिंग का पूरा ब्रेकअप कितना प्रिंसिपल (ओरिजिनल लोन अमाउंट) बचा है, कितना इंटरेस्ट ऐड हुआ है, और क्या लेट पेमेंट चार्ज हैं। यह डॉक्यूमेंट बैंक से मांगें या नेट बैंकिंग से डाउनलोड करें।
2. मुश्किल का सबूत यह आपकी असली सिचुएशन का सबसे ज़रूरी सबूत है। जॉब लॉस लेटर अगर नौकरी गई हो; हॉस्पिटल बिल या डॉक्टर लेटर अगर मेडिकल इमरजेंसी आई हो; बैंक स्टेटमेंट अगर इनकम साफ़-साफ़ कम हो गई हो। जितना साफ़ सबूत, उतना बेहतर।
3. इनकम प्रूफ आपकी अभी की फाइनेंशियल हालत दिखाने वाला कोई भी डॉक्यूमेंट सैलरी स्लिप, बैंक स्टेटमेंट, या इनकम सर्टिफिकेट। इससे बैंक समझेगा कि आप कितना दे सकते हैं।
4. ID प्रूफ़ आधार कार्ड या पैन कार्ड. ये स्टैंडर्ड वेरिफ़िकेशन के लिए चाहिए.
5. बैंक का कोई भी लिखित कम्युनिकेशन अगर बैंक ने कोई रिकवरी नोटिस, NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट बैड लोन मार्क) लेटर, या लीगल नोटिस भेजा है, तो वो भी साथ रखें। यह दिखाता है कि केस सीरियस है और बैंक को सीरियसली लेना चाहिए।
एक ज़रूरी नियम: सेटलमेंट लेटर के बिना कोई भी पेमेंट मत करें। पेमेंट करने के बाद बैंक से NOC (क्लियरेंस लेटर मतलब बैंक का लिखित कन्फर्म करना कि अब आपका कोई बकाया नहीं) ज़रूर मांगें।
अपने नाम पर चल रहे सभी लोन देखने के लिए हमारी नाम पर चल रहे लोन चेक करने की गाइड देखें। सेटलमेंट की शर्तें और नियम यहाँ पढ़ें।
लोन सेटलमेंट का सिबिल स्कोर पर क्या असर होता है?
सेटलमेंट पूरा करने के बाद कई लोगों को हैरानी होती है। इसलिए, पहले ही इसे अच्छी तरह समझ लेना बेहतर है।
जब आप लोन का सेटलमेंट करते हैं, तो आपकी सिबिल रिपोर्ट में उसका स्टेटस "सेटल्ड" दिखता है। यह "क्लोज्ड" से अलग है। "क्लोज्ड" का मतलब है कि लोन पूरी तरह चुका दिया गया है, जिसे न्यूट्रल या पॉजिटिव माना जाता है। "सेटल्ड" का मतलब है कि लोन की रकम में कुछ छूट के साथ उसे बंद किया गया; इस स्टेटस को देखकर भविष्य में लोन देने वाले क्रेडिट देने में बढ़ सकते हैं।
"सेटल्ड" स्टेटस आपकी सिबिल रिपोर्ट पर सात साल तक बना रहता है। इस दौरान नया लोन लेना काफी मुश्किल हो सकता है और आपका सिबिल स्कोर 75–100 पॉइंट तक गिर सकता है। (नोट: सेटलमेंट के असर से जुड़े ये आंकड़े अलग-अलग स्रोतों से लिए गए हैं; लेखक को पब्लिश करने से पहले इनके स्वतंत्र रूप से पुष्टि करनी चाहिए।)
इसका मतलब यह नहीं है कि आपकी ज़िंदगी रुक गई है। अगर पूरा पेमेंट करना सचमुच नामुमकिन है, तो सेटलमेंट एक अच्छा विकल्प है, हालांकि इसके खर्चों को संभालने के लिए तैयार रहना होगा।
सेटलमेंट के बाद अपने सिबिल स्कोर को सुधारना मुमकिन है, हालांकि इसमें मेहनत और समय लगता है। इसके लिए कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई जा सकती, क्योंकि हर व्यक्ति की स्थिति अलग-अलग होती है। असरदार तरीकों में शामिल हैं: दूसरे लोन या ईएमआई का समय पर पेमेंट करना, क्रेडिट कार्ड का बैलेंस ज़्यादा न होने देना और कुछ समय तक नए लोन न लेना।
फ्रीड उन लोगों के लिए सेटलमेंट के बाद सिबिल से जुड़ी गाइडेंस देता है जो यह रास्ता चुनते हैं।
कानून क्या कहता है
RBI के नियम के अनुसार सेटलमेंट एक लिखित समझौता है जिसमें बैंक नकद भुगतान लेकर अपना दावा पूरा मान लेता है। सेटलमेंट के बाद बैंक कम से कम 12 महीने तक उसी व्यक्ति को नया कर्ज़ नहीं दे सकता।
Check My Credit Insightsसेटलमेंट के बाद नया लोन कब मिल सकता है?
इसका कोई तय महीना नहीं है। यह इस पर निर्भर करता है कि आप किस बैंक से लोन माँग रहे हैं और आपकी रिपोर्ट उस समय कैसी दिखती है।
एक नियम पक्का है। जिस बैंक के साथ आपका सेटलमेंट हुआ है, वह कम से कम 12 महीने तक आपको नया कर्ज़ नहीं दे सकता। कई बैंक अपनी नीति में यह समय और लंबा रखते हैं।
दूसरे बैंक आपकी पूरी रिपोर्ट देखते हैं। अगर सेटलमेंट के बाद आपकी बाकी सभी EMI और कार्ड बिल समय पर भरे गए हैं, तो धीरे-धीरे भरोसा लौटता है। इसलिए सेटलमेंट के बाद हर महीने समय पर भुगतान सबसे ज़रूरी कदम है।
अपनी रिपोर्ट में क्या चीज़ स्कोर को नीचे खींच रही है, यह जानना शुरुआत के लिए अच्छा रहता है। फ्रीड का Credit Insights आपकी रिपोर्ट देखकर बताता है कि स्कोर पर क्या असर डाल रहा है और उसे सुधारने के लिए क्या करें।
जानना चाहते हैं कि आपका स्कोर कहाँ खड़ा है?
अपनी रिपोर्ट के हिसाब से सुधार के कदम देखें।
Check My Credit Insightsलोन सेटलमेंट के बाद क्या करें?
सेटलमेंट हो गया अब क्या? ये स्टेप्स फॉलो करें:
1. निपटान पत्र सुरक्षित रखें ये आपका सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसमें लिखा है कि बैंक ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि लोन सेटल हो गया है। इसको स्कैन करें और ईमेल में भी सेव रखें।
2. एनओसी (क्लीयरेंस लेटर) पेमेंट के बाद बैंक से लिखें एनओसी मांगे। एनओसी (क्लीयरेंस लेटर बैंक का कन्फर्म करना कि कोई बकाया नहीं) के बिना लोन तकनीकी रूप से बंद नहीं माना जाता। केवल मौखिक पुष्टि या व्हाट्सएप संदेश नहीं चलता।
3. सिबिल रिपोर्ट चेक करें एनओसी मिलने के कुछ हफ्ते बाद बैंक को सिबिल अपडेट करने में समय लगता है, लेखक को सटीक टाइमलाइन वेरिफाई करनी चाहिए सिबिल रिपोर्ट खींचें और देखें कि स्टेटस "सेटल्ड" दिख रहा है। कोई और बदतर स्थिति जैसा "लिखित-बंद" या "सूट दायर" नहीं होना चाहिए।
4. अगर कुछ गलत दिख रहा हो, सिबिलविवाद बढ़ाएँ अगर सिबिलरिपोर्ट में गलत स्थिति है या बैंक ने अपडेट नहीं किया है, तो सीधे CIBIL की वेबसाइट पर विवाद फ़ाइल करें। हाँ आपका सही है.
5. धीरे-धीरे सिबिल रिपेयर शुरू करें दूसरे लोन या ईएमआई लगातार रखें। क्रेडिट कार्ड का बैलेंस कम रखें. नए लोन से कुछ समय के लिए बचें। ये छोटी छोटी चीज़े मिलके आपका स्कोर वापस ऊपर लाती है टाइम लगता है, पर पॉसिबल है।
पैसा चुकाने के बाद एनओसी कैसे लें, यह हमारे सेटलमेंट के बाद एनओसी वाले लेख में है।
फ्रीड के बारे में
फ्रीड इंडिया की पहली डेट रिलीफ कंपनी 2020 में गुरुग्राम में शुरू हुई थी। फ्रीड क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन, बीएनपीएल, और लोन ऐप्स जैसे अनसिक्योर्ड लोन बैंक और एनबीएफसी से बॉरोअर्स की तरफ से सेटलमेंट नेगोशिएट करता है। फीस सिर्फ तब होती है जब सेटलमेंट सक्सेसफुल हो। सिक्योर्ड लोन जैसे होम लोन, कार लोन, या गोल्ड लोन फ्रीड हैंडल नहीं करता।

Mohit Juneja
Mohit Juneja writes educational content at FREED on debt management, credit scores, loan repayment, and borrowing best practices. His content is shaped by expert insights and industry knowledge, helping readers better understand their financial options and make informed decisions.
mohit.juneja@freed.care
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